बूढ़ी अम्मा का श्राप
*बूढ़ी अम्मा का श्राप*
आज सुबह जब मैं काम पर निकल रहा था तभी घर में कुछ हलचल सी हुई, जैसे कोई अनहोनी घटना घट गयी हो।
मेरे स्वर्गीय पिताजी के परम मित्र का बेटा राजेश भैया मेरे परिवार के साथ बैठे हुए थे और उनके माथे पर बल पड़े हुए थे।
पिछले 80 वर्षों से हमारे और राजेश भैया के परिवार के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं। इनके पास पीढ़ियों से ही अकूत धन संपदा रही है।
इनका मूल खानदानी व्यवसाय ब्याज पर धन देना था और इसके बदले में ये लोग मकान/दुकान/जेवर आदि गिरवी रखवा लिया करते थे। हमारे शहर में पिछले 20 वर्षों से ये सिविल कॉन्ट्रेक्टर(ठेकेदार) थे ।
राजेश भैया करीब 8–10 साल से हमारे घर नहीं आए थे और इनके व्यवहार में हमेशा घमंड की अति रहती थी, इसलिए मन में और भी अधिक उत्सुकता जागी कि आज ये कैसे आए हैं। इन जैसे व्यक्ति की अस्त व्यस्त दशा देखकर मुझसे रहा नहीं गया और वे जैसे ही घर से गये, मैंने माँ से पूछा:
"माँ! सब ठीक तो है न!! ये भैया आज अपने यहाँ?? इतनी सुबह किसलिए आये जो कभी सीधे मुँह बात तक नहीं करते थे?"
उस पर मां ने जो बताया वो मेरे लिए घोर आश्चर्यजनक था!
राजेश भैया पिछले पाँच सालों में शेयर बाज़ार में बुरी तरह बर्बाद हो गए और करीब 20 करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। नगर निगम के जो कॉन्ट्रैक्ट लिए और पूरा किया, उस काम का भुगतान कमिश्नर ने रोक दिया जिससे इनको और बड़ा झटका लगा।
बाकी कामों को पूरा करने के लिए इतने बड़े सेठ को बाज़ार से सूदखोरों से 40 लाख रुपए लेने पड़े।
और अब वो 40 लाख रुपये का ब्याज बढ़ते बढ़ते 70 लाख हो गए हैं। अब इनके पास खाने के पैसे भी नहीं बचे हैं और इसीलिए ये अपना आलीशान बंगला जो शहर की सबसे धनाढ्य बस्ती में है, बेचना पड़ है।
मुझे एक झटका सा लगा। लेकिन माँ ने जो आगे बताया वो और भी बड़ा झटका था, जिसने मुझे ये सब लिखने पर मजबूर कर दिया।
माँ ने बता रही थीं: आज से लगभग 50 वर्ष पहले एक गरीब बूढ़ी महिला ने राजेश भैया के पिताजी से 40 रुपये उधार लिए थे और उसकी एवज में अपनी चांदी की मोटी पायल, झुमके, चैन आदि इनके पास गिरवी रखी थी।
वो बूढ़ी माँ ने खून पसीना एक करके तीन चार सालों में 40 रुपये ब्याज सहित चुका भी दिए, लेकिन इनके पिताजी के मन में चोर समा गया और बूढ़ी अम्मा को झूठे हिसाब किताब बताकर जबरन ब्याज बढ़ाते रहे और उसके जेवर देने से मुकर गए।
कुछ महीनों के संघर्ष के बाद वो बूढ़ी अम्मा थक गई!
हमारा निवास पास में ही था और मैं भी नई नई तेरे पापा के साथ शादी करके आयी थी । उस दिन वो बूढ़ी अम्मा उनके घर गई और फुट फुट के रोई।
रोते रोते बस एक ही बात बोले जा रही थी:
"तेरा सर्वनाश होगा! मेरे 40 रुपये तेरी नस नस से निकलेंगे! नहीं चाहिए मेरे को मेरे जेवर तू रख! अब यही तेरी तबाही का कारण होंगे !"
और कुछ दिन में वो बूढ़ी अम्मा इस दुनिया से चल बसी!
वो 40 रुपये थे जो आज पचास वर्षों में 40 लाख मूलधन + 30 लाख ब्याज होकर 70 लाख हो गए हैं।
इन 70 लाख की वजह से तेरे राजेश भैया की जीते जी मरने वाली हालात हो गयी है बेटा!
मैं यह सब सुनकर अवाक रह गया!
आज तक सुना था कि ऊपरवाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती, मगर आज मेरे सामने सब कुछ प्रत्यक्ष था।
ऊपरवाले की अदालत में न्याय है! देर है पर अंधेर नहीं।
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