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कहाँ से आया सेंगोल? इस सवाल के दो मायने हैं. एक तो ये कि सेंगोल आख़िर है क्या और इसका इतिहास क्या है? दूसरा ये कि अचानक चर्चाओं में कहाँ से आया सेंगोल? पहले मूल वाले सवाल पर... तो बात है देश की आज़ादी से ठीक पहले की. तय हो चुका था कि सत्ता को हस्तांतरित कर अंग्रेज़ जल्द ही अपने मुल्क लौट जाएंगे. ऐसे में अंतिम वायसराय माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू से पूछा, 'क्या सत्ता हस्तांतरण की कोई प्रतीकात्मक प्रक्रिया, चिह्न या समारोह होता है?' नेहरू बोले, 'राजाजी से बेहतर कौन बता सकता है.' तब 'राजाजी' यानी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने सुझाया कि चोल वंश की एक परंपरा है जिसमें 'सेंगोल' को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक माना जाता है. जाता हुआ राजा, आते हुए राजा को पंडे-पुजारियों की मौजूदगी में सेंगोल सौंपता है और आदेश देता है कि वह प्रजा पर 'उचित और न्यायसंगत' तरीक़े से राज करे. सेंगोल तमिल भाषा के 'सेम्मई' शब्द से बना है जिसका अर्थ धर्म / सच्चाई या न्याय परायण है. सेंगोल का सुझाव अप्रूव हो गया तो राजाजी ने इसे बनवाने के लिए तमिलनाडु के कई मठों से संपर्क साध...