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Showing posts from June, 2023

स्वर्ग का सेब

 *स्वर्ग का सेब*        एक बार स्वर्ग से घोषणा हुई कि भगवान सेब बाँटने आ रहे हैं, सभी लोग भगवान के प्रसाद के लिए तैयार हो कर लाइन लगाकर खड़े हो गए। एक छोटी बच्ची बहुत उत्सुक थी क्योंकि वह पहली बार भगवान को देखने जा रही थी। एक बड़े और सुंदर सेब के साथ साथ भगवान के दर्शन की कल्पना से ही खुश थी। अंत में प्रतीक्षा समाप्त हुई। बहुत लंबी कतार में जब उसका नम्बर आया तो भगवान ने उसे एक बड़ा और लाल सेब दिया। लेकिन जैसे ही उसने सेब पकड़कर लाइन से बाहर निकली उसका सेब हाथ से छूटकर कीचड़ में गिर गया। बच्ची उदास हो गई। अब उसे दुबारा से लाइन में लगना पड़ेगा। दूसरी लाइन पहली से भी लंबी थी। लेकिन कोई और रास्ता नहीं था। सब लोग ईमानदारी से अपनी बारी-बारी से सेब लेकर जा रहे थे।         अन्ततः वह बच्ची फिर से लाइन में लगी और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगी। आधी क़तार को सेब मिलने के बाद सेब ख़त्म होने लगे। अब तो बच्ची बहुत उदास हो गई। उसने सोचा कि उसकी बारी आने तक तो सब सेब खत्म हो जाएंगे। लेकिन वह ये नहीं जानती थी कि भगवान के भंडार कभी ख़ाली नही होते। जब तक उसकी बारी आई त...

बूढ़ी अम्मा का श्राप

*बूढ़ी अम्मा का श्राप* आज सुबह जब मैं काम पर निकल रहा था तभी घर में कुछ हलचल सी हुई, जैसे कोई अनहोनी घटना घट गयी हो। मेरे स्वर्गीय पिताजी के परम मित्र का बेटा राजेश भैया मेरे परिवार के साथ बैठे हुए थे और उनके माथे पर बल पड़े हुए थे। पिछले 80 वर्षों से हमारे और राजेश भैया के परिवार के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं। इनके पास पीढ़ियों से ही अकूत धन संपदा रही है।  इनका मूल खानदानी व्यवसाय ब्याज पर धन देना था और इसके बदले में ये लोग मकान/दुकान/जेवर आदि गिरवी रखवा लिया करते थे। हमारे शहर में पिछले 20 वर्षों से ये सिविल कॉन्ट्रेक्टर(ठेकेदार) थे । राजेश भैया करीब 8–10 साल से हमारे घर नहीं आए थे और इनके व्यवहार में हमेशा घमंड की अति रहती थी, इसलिए मन में और भी अधिक उत्सुकता जागी कि आज ये कैसे आए हैं। इन जैसे व्यक्ति की अस्त व्यस्त दशा देखकर मुझसे रहा नहीं गया और वे जैसे ही घर से गये, मैंने माँ से पूछा: "माँ! सब ठीक तो है न!! ये भैया आज अपने यहाँ?? इतनी सुबह किसलिए आये जो कभी सीधे मुँह बात तक नहीं करते थे?" उस पर मां ने जो बताया वो मेरे लिए घोर आश्चर्यजनक था!  राजेश भैया पिछले पाँच सालों मे...

न्यायधीश का अनोखा दंड

#न्यायधीश का अनोखा दंड 🙏🙏 अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।  जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, "क्या तुमने सचमुच चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट"? लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया- जी हाँ। जज :- क्यों ? लड़का :- मुझे ज़रूरत थी। जज :-  खरीद लेते। लड़का :- पैसे नहीं थे। जज:- घर वालों से ले लेते। लड़का:- घर में सिर्फ मां है। बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी। जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ? लड़का:- करता था एक कार वाश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया। जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते? लड़का:- सुबह से घर से निकला था, लगभग पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया। जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और विशेषतौर से ब्रैड की चोरी बहुत ही शर्मनाक अपराध है और इस अपराध के हम सब ज़िम्मेदार हैं। "अदालत में मौजूद हर शख़्स.. मुझ सहित सभी अपराधी हैं, इसलिए यहाँ मौजूद प्रत...